वह चलती है, झनकते हुए बाजूबंद,
धूल से सफेद पैरों से नंगे पाँव:
साधारण लड़की, न किसी राजा की बेटी,
पर अपने सुदृढ़ शरीर को गर्व से ढोलती।
ओ, भारतीय महिलाएँ — प्रकाश और आशीर्वाद,
हर नज़र में — ज्ञान, दिल में — आशीर्वाद।
युगों के पार, समय के पार, प्रभात के पार,
तुम्हारा सुंदर रूप दिल में सदा बना रहेगा।
क्या वह महिला? उसका चेहरा काला है,
सूरज ने गालों पर झुर्रियाँ जला दी हैं,
पर, जैसे नदी में नाव, वह बहती चली जाती है,
और विनम्र नज़र में बुद्धि की ताकत दमकती है।
ओ, भारतीय महिलाएँ — प्रकाश और आशीर्वाद,
हर नज़र में — ज्ञान, दिल में — आशीर्वाद।
युगों के पार, समय के पार, प्रभात के पार,
तुम्हारा सुंदर रूप दिल में सदा बना रहेगा।
चाहे आत्मा की पूर्णता हो या शरीर की सुंदरता,
शानदार साड़ी में या मद्धम कमीज़ में,
सब भारतीय महिलाएँ — उज्ज्वल फूल हैं,
महलों की देवियाँ और गलियों की भी।
ओ, भारतीय महिलाएँ… प्रकाश और आशीर्वाद…
हर नज़र में — ज्ञान… दिल में — आशीर्वाद…
युगों के पार… समय के पार… तुम्हारा सुंदर रूप…
सदा… दिल में… बना रहेगा…
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